मुख्यमंत्री के गड्ढामुक्त सड़क के आदेश की अवहेलना , नगर निगम के सहारा स्टेट वाली सड़क पर सैकड़ों गड्ढे
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मुख्यमंत्री के गड्ढामुक्त सड़क अभियान पर सवाल, सहारा स्टेट की सड़क पर सैकड़ों गड्ढे
करीब एक किलोमीटर सड़क पर 500 से अधिक गड्ढों का दावा, पैचवर्क के एक महीने बाद ही सड़क फिर बदहाल होने का आरोप

लखनऊ। मुख्यमंत्री की ओर से सड़कों को गड्ढामुक्त रखने और जनसुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन राजधानी लखनऊ में नगर निगम जोन-3 की एक सड़क की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। हाल की बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में गड्ढों और क्षतिग्रस्त सड़कों की समस्या सामने आई है।
सहारा स्टेट से सहारा ग्रेस होते हुए सहारा स्टेट के गेट नंबर-2 तक जाने वाली सड़क पर स्थानीय लोगों के मुताबिक जगह-जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। स्थानीय स्तर पर करीब एक किलोमीटर के इस मार्ग पर 500 से अधिक गड्ढे होने का दावा किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क की मरम्मत के बाद दोबारा यही स्थिति बन रही है, तो आखिर मरम्मत की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई?
बिजली विभाग ने सड़क खोदी, भुगतान भी किया, फिर भी नहीं टिक पाया पैचवर्क?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर बिजली विभाग की ओर से भूमिगत केबल डालने के लिए सड़क की कटिंग की गई थी। बताया जा रहा है कि रोड कटिंग की धनराशि भी संबंधित विभाग द्वारा जमा कराई गई और इसके बाद पैचवर्क कराया गया।
लेकिन आरोप है कि पैचवर्क के करीब एक महीने बाद ही सड़क फिर उखड़ने लगी।
ऐसे में सवाल सिर्फ सड़क के गड्ढों का नहीं, बल्कि सरकारी धन से हुए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और उसकी निगरानी का भी है।
सुबह से शाम तक स्कूली बच्चों और हजारों लोगों की आवाजाही
यह सड़क कोई सुनसान मार्ग नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह से शाम तक स्कूली बच्चों, अभिभावकों, दोपहिया वाहन चालकों और आसपास की कॉलोनियों के हजारों लोगों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है।
गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बच्चे और राहगीर इन गड्ढों की वजह से चोटिल भी हुए हैं।
छुइया पुरवा चौराहे से जानकीपुरम थाने की ओर जाने वाली सड़क भी सवालों के घेरे में
इसी क्षेत्र में छुइया पुरवा चौराहे से जानकीपुरम थाने की तरफ आने-जाने वाली सड़क की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर भी जगह-जगह सैकड़ों गड्ढे बने हुए हैं।
बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना और मुश्किल हो जाता है। राजधानी में हाल की बारिश के दौरान गड्ढों और खराब सड़कों से आवागमन प्रभावित होने की रिपोर्टें भी सामने आई हैं।
भाजपा विधायक, भाजपा पार्षद और भाजपा की मेयर—फिर भी सड़क क्यों बदहाल?
इस पूरे मामले में राजनीतिक प्रतिनिधित्व से ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल जवाबदेही का है।
जब क्षेत्र में निर्वाचित जनप्रतिनिधि मौजूद हैं और प्रदेश सरकार सड़क सुधार को प्राथमिकता दे रही है, तो फिर नगर निगम की जिम्मेदारी वाले मार्गों पर ऐसी स्थिति आखिर क्यों बनी हुई है?
क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया?
क्या पैचवर्क की गुणवत्ता की जांच हुई?
क्या रोड कटिंग के बाद कराए गए कार्य की गुणवत्ता का कोई परीक्षण हुआ?
और यदि सड़क एक महीने में फिर उखड़ गई तो जिम्मेदारी किसकी तय हुई?
मुख्य अभियंता की निगरानी पर भी उठे सवाल
सड़क की मौजूदा स्थिति नगर निगम के अभियंत्रण विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। यदि किसी मुख्य मार्ग पर सैकड़ों गड्ढे बन जाएं और लंबे समय तक उनकी मरम्मत न हो, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि अधिकारी नियमित निरीक्षण किस स्तर पर कर रहे हैं?
लखनऊ नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर अभियंत्रण विभाग से जुड़े विभिन्न कार्यों और सितंबर 2026 के कई टेंडर भी प्रदर्शित हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम इस सड़क की वास्तविक स्थिति का मौके पर निरीक्षण कराकर गड्ढों की संख्या, सड़क की गुणवत्ता और पहले कराए गए पैचवर्क की जिम्मेदारी तय करता है या नहीं।
स्थानीय लोगों की मांग है कि सड़क की सिर्फ खानापूर्ति वाली मरम्मत न कराकर तकनीकी जांच के साथ टिकाऊ निर्माण कराया जाए, ताकि स्कूली बच्चों और आम राहगीरों को रोजाना जोखिम उठाकर सफर न करना पड़े।

रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज
Star News Bharat, लखनऊ



