नगर निगम लखनऊ में 7,141 शिकायतें लंबित! जनता की समस्याओं पर विभागों की सुस्ती, नगर आयुक्त के सामने बड़ी चुनौती

नगर निगम लखनऊ में 7,141 शिकायतें लंबित! जनता की समस्याओं पर विभागों की सुस्ती, नगर आयुक्त के सामने बड़ी चुनौती
पब्लिक हेल्थ और सिविल इंजीनियरिंग विभाग में सबसे ज्यादा शिकायतें पेंडिंग, क्या सिर्फ शिकायत दर्ज करना ही नगर निगम की जिम्मेदारी है?
लखनऊ। राजधानी लखनऊ को बेहतर और व्यवस्थित शहर बनाने के दावे के बीच नगर निगम के विभागों में लंबित शिकायतों का आंकड़ा चौंकाने वाला है। पिछले महीने के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक नगर निगम के विभिन्न विभागों में कुल 7,141 शिकायतें लंबित हैं। इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें पब्लिक हेल्थ और सिविल इंजीनियरिंग विभाग से जुड़ी हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि शहर की सफाई, सड़क, नाली, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान की रफ्तार पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
किस विभाग में कितनी शिकायतें लंबित?
नगर निगम के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक विभागवार लंबित शिकायतों की स्थिति इस प्रकार है—
| विभाग | लंबित शिकायतें |
|---|---|
| पब्लिक हेल्थ विभाग | 2,619 |
| सिविल इंजीनियरिंग विभाग | 2,320 |
| उद्यान विभाग | 796 |
| जलकल विभाग | 614 |
| सेंट्रलाइज्ड सर्विसेज | 380 |
| पशु चिकित्सा विभाग | 151 |
| स्ट्रीट लाइट विभाग | 119 |
| आरआर विभाग | 79 |
| टैक्स विभाग | 63 |
| कुल | 7,141 |
सफाई और निर्माण विभाग में सबसे ज्यादा शिकायतें
आंकड़ों पर नजर डालें तो पब्लिक हेल्थ विभाग 2,619 लंबित शिकायतों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि सिविल इंजीनियरिंग विभाग में 2,320 शिकायतें लंबित हैं। यानी इन दोनों विभागों में ही कुल 4,939 शिकायतें लंबित हैं।
उद्यान विभाग में 796 और जलकल विभाग में 614 शिकायतें लंबित होना भी चिंता का विषय है। ये वे विभाग हैं जिनकी कार्यप्रणाली सीधे तौर पर आम नागरिकों की रोजमर्रा की सुविधाओं से जुड़ी हुई है।
नगर आयुक्त गौरव कुमार को अपनाना होगा सख्त रुख
नगर निगम में शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और अधिकारियों की है। ऐसे में नगर आयुक्त गौरव कुमार के सामने अब इन शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित कराना बड़ी चुनौती है।
जरूरत है कि नगर आयुक्त विभागवार लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा करें। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के स्तर पर शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं, उनसे जवाब-तलब किया जाए। साथ ही शिकायतों के निस्तारण के लिए समयसीमा तय कर लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जाए।
सिर्फ पोर्टल पर शिकायत को निस्तारित दिखा देना पर्याप्त नहीं होना चाहिए, बल्कि मौके पर समस्या का समाधान हुआ या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है।
जनता पूछ रही है- शिकायत करें तो समाधान कब मिलेगा?
शहर का नागरिक सड़क, सफाई, जलभराव, नाली, पार्क और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं को लेकर नगर निगम से उम्मीद करता है। लेकिन जब हजारों शिकायतें लंबित रहती हैं तो आम नागरिकों के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि आखिर उनकी समस्या का समाधान कब होगा?
अब देखना होगा कि नगर आयुक्त इन 7,141 लंबित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों पर कितनी सख्ती दिखाते हैं और कितनी शिकायतों का वास्तविक निस्तारण सुनिश्चित करा पाते हैं।
क्योंकि स्मार्ट और स्वच्छ लखनऊ का सपना केवल योजनाओं और दावों से नहीं, बल्कि जनता की शिकायतों के समयबद्ध समाधान से पूरा होगा।
रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज
स्टार न्यूज़ भारत, लखनऊ



