यूपी में गड्ढामुक्त सड़क अभियान की धीमी रफ्तार पर सख्त हुए पीडब्ल्यूडी प्रमुख सचिव-अजय चौहान

यूपी में गड्ढामुक्त सड़क अभियान की धीमी रफ्तार पर सख्त हुए पीडब्ल्यूडी प्रमुख सचिव-अजय चौहान
प्रमुख सचिव अजय चौहान ने दिए तेजी लाने के निर्देश, बोले—गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज
लखनऊ, 27 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने और उनके नवीनीकरण के अभियान को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए शासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग अजय चौहान ने समीक्षा बैठक में धीमी प्रगति वाले विभागों को अपनी कार्यशैली सुधारने और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़कों की मरम्मत और निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 24 अक्टूबर तक की प्रगति की समीक्षा के दौरान सामने आया कि प्रदेश में विभिन्न विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के तहत कुल 92,677.10 किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त करने और उनके नवीनीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 56,906.43 किलोमीटर सड़कों पर काम पूरा हो चुका है। इस तरह कुल लक्ष्य का 61.4 प्रतिशत कार्य संपन्न हुआ है। शेष कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए प्रमुख सचिव ने अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए।
पीडब्ल्यूडी ने पूरा किया 60.71 प्रतिशत काम
लोक निर्माण विभाग ने अपने 77,314.63 किलोमीटर के लक्ष्य के सापेक्ष 50,885.59 किलोमीटर सड़क का कार्य पूरा कर लिया है। विभाग की प्रगति 60.71 प्रतिशत दर्ज की गई। प्रमुख सचिव ने शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
पंचायती राज विभाग की सबसे धीमी रफ्तार
समीक्षा बैठक में विभागों की प्रगति में बड़ा अंतर सामने आया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में 96.94 प्रतिशत और पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में 97.10 प्रतिशत कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई। वहीं, पीआईयू मोर्थ की प्रगति 85.01 प्रतिशत और नगर विकास विभाग की प्रगति 75.64 प्रतिशत रही।
इसके विपरीत पंचायती राज विभाग महज 6.10 प्रतिशत प्रगति के साथ सबसे पीछे रहा। मंडी परिषद ने 21.40 प्रतिशत और सिंचाई विभाग ने 25.34 प्रतिशत कार्य पूरा किया। धीमी प्रगति पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए तत्काल मैनपावर बढ़ाने और कार्यप्रणाली में सुधार करने के निर्देश दिए गए।
घटिया सामग्री मिली तो एजेंसियों पर कार्रवाई
प्रमुख सचिव अजय चौहान ने कहा कि सड़क निर्माण और मरम्मत में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने वाली एजेंसियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने क्षेत्रीय और जिला स्तर के अधिकारियों को नियमित रूप से सड़कों का भौतिक निरीक्षण करने तथा कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों को प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के लिए भी कहा गया है, ताकि अभियान की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।
लक्ष्य पूरा करने की चुनौती
प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य का अभी 38.6 प्रतिशत कार्य शेष है। ऐसे में विभिन्न विभागों के सामने निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। खासकर पंचायती राज, मंडी परिषद और सिंचाई विभाग को अपनी रफ्तार बढ़ानी होगी। शासन की सख्ती के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि धीमी प्रगति वाले विभाग जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से काम करते हैं और आम जनता को गड्ढों से भरी सड़कों से कब तक राहत मिलती है।




