लखनऊ

Lucknow-जलकल का जाल-बिना पेयजल लाइन बिछाए वसूला जा रहा जलकर! सृष्टि अपार्टमेंट के आवंटी ने उठाए सवाल

बिना पेयजल लाइन बिछाए वसूला जा रहा जलकर! सृष्टि अपार्टमेंट के आवंटी ने उठाए सवाल

महापौर और महाप्रबंधक जलकल को प्रार्थना पत्र भेजकर बिल संशोधित करने की मांग, जल संयोजन के बिना वाटर टैक्स वसूली पर सवाल

Ritesh Srivastava
लखनऊ। जानकीपुरम विस्तार स्थित सृष्टि अपार्टमेंट में बिना पेयजल पाइपलाइन बिछाए और जल संयोजन उपलब्ध कराए ही जलकर वसूले जाने का मामला सामने आया है। अपार्टमेंट के आवंटी विवेक शर्मा ने इस संबंध में नगर निगम की महापौर और जलकल विभाग के महाप्रबंधक को प्रार्थना पत्र भेजकर वित्तीय वर्ष 2026-27 के जलकल बिल में संशोधन करने की मांग की है।

आवंटी के मुताबिक, जलकल विभाग के जोन-3 की ओर से भवन संख्या Z3V/H-Block/FN-****, सृष्टि अपार्टमेंट, कुर्सी रोड विस्तार, जानकीपुरम-3 के लिए 21 अक्टूबर 2026 को 822 रुपये का संयुक्त पेयजल एवं सीवर बिल जारी किया गया। विभाग के संदेश में बिल की अंतिम भुगतान तिथि 20 नवंबर 2026 बताई गई है।

बिना कनेक्शन जलकर क्यों?

विवेक शर्मा का कहना है कि सृष्टि अपार्टमेंट क्षेत्र में जलकल विभाग की ओर से शुद्ध पेयजल की मुख्य पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है और न ही आवंटियों को जल संयोजन उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में पेयजल आपूर्ति की सुविधा दिए बिना जलकर की मांग करना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि वह सीवर कर का भुगतान करने के लिए तैयार हैं। उनकी मांग है कि पेयजल सुविधा उपलब्ध न होने की स्थिति में बिल से जलकर की राशि हटाकर केवल नियमानुसार देय सीवर कर का संशोधित बिल जारी किया जाए।

बिल जमा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी

जलकल विभाग की ओर से भेजे गए व्हाट्सऐप संदेश में बकाया बिल का भुगतान नहीं होने पर जल एवं सीवर संयोजन विच्छेदन तथा नियमानुसार वसूली की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। विभाग ने ऑनलाइन भुगतान के लिए अपनी वेबसाइट का विकल्प भी दिया है।

इसी चेतावनी के बीच आवंटी ने सवाल उठाया है कि जब पेयजल कनेक्शन ही उपलब्ध नहीं है, तो जलकर की वसूली किस आधार पर की जा रही है? उन्होंने विभाग से मामले की जांच कर बिल को संशोधित करने और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।

अब महापौर और जलकल महाप्रबंधक पर निगाहें

यह मामला नगर निगम की राजस्व वसूली व्यवस्था और नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं के बीच तालमेल पर सवाल खड़ा करता है। यदि किसी क्षेत्र में पेयजल कनेक्शन उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित भवन पर जलकर लगाने का आधार क्या है, इसकी विभागीय जांच जरूरी है।

अब देखना होगा कि महापौर और जलकल विभाग के अधिकारी आवंटी की शिकायत पर क्या निर्णय लेते हैं। क्या बिल की जांच कर पेयजल कर हटाया जाएगा या आवंटी को अपनी मांग के समर्थन में आगे भी विभागीय चक्कर लगाने पड़ेंगे?

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