LDA-उपाध्यक्ष के सपनों पर इंजीनियरिंग विभाग का पानी! एक करोड़ के खेल मैदान में खामियां ही खामियां
LDA के खेल मैदान में कैसा विकास? पाथवे बिना रेलिंग, कीचड़ में ओपन जिम!

एलडीए के खेल मैदान में विकास के नाम पर खानापूर्ति! करीब एक करोड़ खर्च होने के बावजूद अधूरा काम, सुरक्षा पर भी सवाल
जनहित की खबर पहुंचने पर एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने लिया था संज्ञान, अब निर्माण की गुणवत्ता और इंजीनियरों की कार्यशैली पर उठे सवाल
लखनऊ। राजधानी के कुर्सी रोड स्थित जानकीपुरम सेक्टर के एलडीए खेल मैदान में विकास कार्यों के नाम पर बड़ा खेल होने का मामला सामने आया है। जिस खेल मैदान को कभी जंगल और गड्ढों से निजात दिलाकर स्थानीय लोगों के लिए उपयोगी बनाने की योजना तैयार की गई थी, उसके जीर्णोद्धार के बाद भी कई बुनियादी खामियां दिखाई दे रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है।
दरअसल, इस खेल मैदान की बदहाली को लेकर स्टार न्यूज़ भारत ने प्रमुखता से जनहित में खबर प्रकाशित की थी। खबर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए मैदान के कायाकल्प के निर्देश दिए थे। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया गया। इससे स्थानीय लोगों में बेहतर खेल मैदान और मॉर्निंग वॉक की सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी।
लेकिन अब निर्माण कार्य की स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाथवे के किनारे रेलिंग गायब, हादसे का खतरा
मैदान में मॉर्निंग वॉक के लिए पाथवे तो बना दिया गया, लेकिन उसके किनारे रेलिंग नहीं लगाई गई है। जबकि पाथवे के आसपास कई स्थानों पर गहरे गड्ढे मौजूद हैं। ऐसे में सुबह-शाम टहलने आने वाले बुजुर्गों और बच्चों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि किसी व्यक्ति का संतुलन बिगड़ जाए तो उसे गिरने से बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कहां है?
बाउंड्री वॉल की पेंटिंग में भी गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक खेल मैदान की बाउंड्री वॉल पर बिना उचित तैयारी और पुट्टी के ही निम्न स्तर की पेंटिंग कराई गई है। कई स्थानों पर दीवार कमजोर दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई और संबंधित इंजीनियरों ने कार्य का निरीक्षण किया भी या नहीं?
ओपन जिम लगा, लेकिन कीचड़ से कैसे पहुंचे लोग?
देश के रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह की पहल पर शहर के लोगों को ओपन जिम की सुविधा देने की योजना के तहत इस मैदान में भी व्यायाम उपकरण लगाए गए हैं। लेकिन मैदान में मौजूद कीचड़ और अधूरी व्यवस्थाओं के कारण लोगों को ओपन जिम तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। सवाल यह है कि जब लोगों को व्यायाम की सुविधा ही आसानी से नहीं मिलेगी तो ओपन जिम लगाने का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?
विवेक शर्मा ने निर्माण कार्य पर उठाए सवाल
ग्रेटर लखनऊ जनकल्याण महासमिति के महासचिव विवेक शर्मा ने खेल मैदान में कराए गए निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जनहित में तैयार की गई योजना का लाभ तभी मिलेगा, जब निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हो और लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए।

उपाध्यक्ष के निर्देशों पर इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही भारी?
जानकारी के मुताबिक, खेल मैदान के सौंदर्यीकरण के लिए 19 मार्च 2025 को ही निर्देश दिए गए थे। इस भूमिगत खेल मैदान का शिलान्यास उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. नीरज बोरा ने किया था। वहीं, एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की पहल के बाद इसके कायाकल्प की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
अब सवाल जोन-5 के इंजीनियरिंग विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित निगरानी और गुणवत्ता की जांच की गई होती तो आज ये खामियां सामने नहीं आतीं।
जनसुनवाई में भी पहुंचा था मामला, करीब एक करोड़ खर्च का था प्रस्ताव
बुधवार को आयोजित जनता दर्शन में ग्रेटर लखनऊ जनकल्याण महासमिति के पदाधिकारियों ने खेल मैदान की बदहाली का मुद्दा उठाया था। उन्होंने मैदान में अवैध कब्जे, कूड़े और गंदगी के कारण इसके अनुपयोगी होने की शिकायत की थी। इस पर एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया था कि खेल मैदान का सर्वेक्षण कराया गया है और सुविधाओं के उच्चीकरण एवं सौंदर्यीकरण पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
अब एलडीए से जनता के सवाल
स्थानीय लोगों की मांग है कि एलडीए के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराएं। पाथवे के किनारे सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए, बाउंड्री वॉल की मरम्मत और गुणवत्तापूर्ण पेंटिंग कराई जाए तथा ओपन जिम तक पहुंचने का रास्ता दुरुस्त किया जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उपाध्यक्ष स्तर से खेल मैदान को बेहतर बनाने की पहल की गई, तो फिर अधूरे और असुरक्षित निर्माण के जरिए उस मंशा पर पानी क्यों फेरा जा रहा है?
अब देखना होगा कि एलडीए का इंजीनियरिंग विभाग इन खामियों को दूर कर मैदान को वास्तव में जनता के उपयोग लायक बनाता है या फिर यह खेल मैदान कागजों पर विकास और जमीन पर अधूरी व्यवस्था की कहानी बनकर रह जाएगा।
रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज
स्टार न्यूज़ भारत, लखनऊ



