लखनऊ

महापरिनिर्वाण मंदिर से रामाभार स्तूप तक निकली 17वीं भव्य यात्रा, भारत-थाई मैत्री को मिली नई ऊंचाई

बुद्ध धातु शोभा यात्रा’ से धम्ममय हुआ कुशीनगर, बना ‘मिनी थाईलैंड’

‘बुद्ध धातु शोभा यात्रा’ से धम्ममय हुआ कुशीनगर, बना ‘मिनी थाईलैंड’

महापरिनिर्वाण मंदिर से रामाभार स्तूप तक निकली 17वीं भव्य यात्रा, भारत-थाई मैत्री को मिली नई ऊंचाई

लखनऊ/कुशीनगर, 24 फरवरी 2026। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में आस्था, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सद्भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। पांच दिवसीय (20–24 फरवरी) समारोह के समापन अवसर पर 17वीं पवित्र ‘बुद्ध धातु शोभा यात्रा’ हाथी-घोड़े, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। यात्रा महापरिनिर्वाण मंदिर से प्रारंभ होकर रामाभार स्तूप पहुंचकर संपन्न हुई।


थाई मोनेस्ट्री, कुशीनगर द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में थाईलैंड के राजदूत चवानाथ थानसून फांट सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। हजारों स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ 200 से अधिक विदेशी बौद्ध अनुयायियों ने शोभायात्रा में भाग लिया, जिससे पूरा नगर ‘मिनी थाईलैंड’ में तब्दील नजर आया।

🌏 भारत-थाई सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘बुद्ध धातु शोभा यात्रा’ जैसे आयोजन भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करते हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आध्यात्मिक उत्सव न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सद्भाव को भी सुदृढ़ करते हैं।

🎭 थाई कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति

थाईलैंड से आए करीब 50 कलाकारों ने पारंपरिक ‘सोम पोथा फ्रा धात’ नृत्य की प्रस्तुति दी। पारंपरिक परिधान, सौम्य मुद्राएं और लयबद्ध भाव-भंगिमाओं ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। थाई बौद्ध धर्म गुरु फ्रा था थेप बोधियोंग तथा प्रमुख भिक्षु फ्राविडेश्चेरियन (डॉ. पी. सोम पोंग) के मार्गदर्शन में विशेष पूजा-अर्चना सम्पन्न हुई।

🕊️ पांच दिवसीय आध्यात्मिक उत्सव

समारोह के दौरान गायन, चित्रकला एवं रंग भरने की प्रतियोगिताएं, मंत्रोच्चार, भिक्षादान और निःशुल्क चिकित्सा शिविर जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। समापन अवसर पर विजेताओं को सम्मानित भी किया गया।

📈 रिकॉर्ड विदेशी पर्यटक आगमन

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध स्थलों—कुशीनगर, कौशांबी, संकिसा, श्रावस्ती, कपिलवस्तु और सारनाथ—में 4.42 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। प्रदेश का बौद्ध सर्किट आज वैश्विक श्रद्धालुओं और शोधार्थियों के लिए प्रमुख केंद्र बन चुका है।

‘बुद्ध धातु शोभा यात्रा’ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भगवान बुद्ध की करुणा और शांति का संदेश सीमाओं से परे है। कुशीनगर में आयोजित यह भव्य आयोजन भारत-थाई सांस्कृतिक मैत्री और वैश्विक आध्यात्मिक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

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