लखनऊ नगर निगम की हाउस टैक्स वसूली में 12 करोड़ की बढ़ोतरी, वृद्धि के मामले में जोन-1 सबसे आगे

लखनऊ नगर निगम की हाउस टैक्स वसूली में 12 करोड़ की बढ़ोतरी, वृद्धि के मामले में जोन-1 सबसे आगे
रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज
जोनल अधिकारी ओम प्रकाश और कर अधीक्षक अनुराग उपाध्याय के नेतृत्व में जोन-1 ने पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ा, 7.24 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली
नगर आयुक्त गौरव कुमार के नेतृत्व में राजस्व बढ़ाने की मुहिम तेज, कुल वसूली में जोन-4 और सालाना वृद्धि में जोन-1 ने मारी बाजी
लखनऊ। लखनऊ नगर निगम में हाउस टैक्स वसूली को लेकर चल रहे अभियान के बीच राजस्व संग्रह के तुलनात्मक आंकड़े सामने आए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल से नौ अक्टूबर तक की रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम की कुल हाउस टैक्स वसूली में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब 12 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आठ जोनों के प्रदर्शन में कुल वसूली के मामले में जोन-4 पहले स्थान पर है, जबकि पिछले वर्ष के मुकाबले वसूली में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज कराकर जोन-1 ने सभी जोनों को पीछे छोड़ दिया है।
जोन-1 ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 7 करोड़ 24 लाख रुपये की अतिरिक्त वसूली दर्ज की है। जोनल अधिकारी ओम प्रकाश और कर अधीक्षक अनुराग उपाध्याय के नेतृत्व में सामने आया यह प्रदर्शन जोन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वहीं, नगर आयुक्त गौरव कुमार के नेतृत्व में नगर निगम स्तर पर राजस्व संग्रह बढ़ाने की मुहिम जारी है।
जोन-1 ने वृद्धि में तोड़ा पिछले साल का रिकॉर्ड
हाउस टैक्स वसूली की इस प्रतिस्पर्धा में जोन-1 ने पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले सर्वाधिक वृद्धि दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार, एक अप्रैल से नौ अक्टूबर 2025 तक जोन-1 की कुल वसूली लगभग 30.14 करोड़ रुपये थी, जो इसी अवधि में वर्ष 2026 के दौरान बढ़कर करीब 37.38 करोड़ रुपये पहुंच गई।
इस तरह जोन-1 ने लगभग 7.24 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की। आठ जोनों में साल-दर-साल वृद्धि के लिहाज से यह सबसे बड़ा आंकड़ा है।
जोनल अधिकारी ओम प्रकाश और कर अधीक्षक अनुराग उपाध्याय के नेतृत्व में जोन-1 का यह प्रदर्शन उल्लेखनीय है। हाउस टैक्स वसूली में पिछले वर्ष के मुकाबले इतनी बड़ी बढ़ोतरी हासिल करना राजस्व संग्रह की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस उपलब्धि से जोन-1 ने यह स्पष्ट किया है कि कुल वसूली में शीर्ष स्थान पर होना ही सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं है, बल्कि पिछले वर्ष के प्रदर्शन में कितना सुधार हुआ, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अब जोन-1 के सामने इस बढ़त को बरकरार रखने और वित्तीय वर्ष के शेष महीनों में वसूली की रफ्तार बनाए रखने की चुनौती होगी।
कुल वसूली में जोन-4 नंबर-1, 70 करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ा
कुल हाउस टैक्स वसूली के मामले में जोन-4 ने सभी आठ जोनों में पहला स्थान हासिल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नौ अक्टूबर 2026 तक जोन-4 की कुल वसूली लगभग 70.11 करोड़ रुपये रही। पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले यहां करीब 3.50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जोन-4 का प्रदर्शन बताता है कि कुल राजस्व संग्रह में यह जोन सबसे आगे है। वहीं, वृद्धि के मामले में जोन-1 की उपलब्धि अधिक है। इस प्रकार दोनों जोनों ने अलग-अलग पैमानों पर बेहतर प्रदर्शन किया है।
जोन-3 ने भी दर्ज की अच्छी बढ़ोतरी
जोन-3 ने नौ अक्टूबर तक लगभग 44.68 करोड़ रुपये की कुल वसूली की। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में यहां करीब 2.86 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल वसूली के लिहाज से जोन-3 भी प्रमुख योगदान देने वाले जोनों में शामिल है।
जोन-2 और जोन-5 में भी पिछले वर्ष के मुकाबले वसूली बढ़ी है। हालांकि, इनकी वृद्धि जोन-1 की तुलना में काफी कम रही। दूसरी ओर, जोन-6, जोन-7 और जोन-8 में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले वसूली में गिरावट दर्ज की गई है।
आठों जोनों की हाउस टैक्स वसूली का पूरा ब्यौरा
नगर निगम की तुलनात्मक रिपोर्ट के अनुसार, एक अप्रैल से नौ अक्टूबर 2026 तक जोनों की कुल वसूली और पिछले वर्ष के मुकाबले अंतर इस प्रकार है:
- जोन-1: 37.38 करोड़ रुपये की कुल वसूली, लगभग 7.24 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी।
- जोन-2: 13.96 करोड़ रुपये की कुल वसूली, लगभग 1.08 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी।
- जोन-3: 44.68 करोड़ रुपये की कुल वसूली, लगभग 2.86 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी।
- जोन-4: 70.11 करोड़ रुपये की कुल वसूली, लगभग 3.50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी।
- जोन-5: 18.80 करोड़ रुपये की कुल वसूली, लगभग 6 लाख रुपये की बढ़ोतरी।
- जोन-6: 20.23 करोड़ रुपये की कुल वसूली, लगभग 65 लाख रुपये की कमी।
- जोन-7: 33.12 करोड़ रुपये की कुल वसूली, लगभग 1.11 करोड़ रुपये की कमी।
- जोन-8: 68.70 करोड़ रुपये की कुल वसूली, लगभग 97 लाख रुपये की कमी।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुल वसूली में जोन-4 सबसे आगे है, जबकि वृद्धि के मामले में जोन-1 ने बाजी मारी है। जोन-8 कुल वसूली में दूसरे स्थान पर होने के बावजूद पिछले वर्ष के मुकाबले पीछे रहा। वहीं, जोन-6 और जोन-7 में भी गिरावट दर्ज की गई है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के स्तर पर ऐसे जोनों की वसूली की समीक्षा करना और कमी के कारणों की पहचान कर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि सभी जोन राजस्व संग्रह में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
ओटीएस के तहत 2,947 मकानों का विवरण
हाउस टैक्स वसूली के साथ नगर निगम की एकमुश्त समाधान योजना यानी ओटीएस के आंकड़े भी रिपोर्ट में शामिल हैं। नौ अक्टूबर तक सभी आठ जोनों में कुल 2,947 ओटीएस हाउस दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में ओटीएस मद में लगभग 4.32 करोड़ रुपये की राशि दर्शाई गई है।
ओटीएस योजना के माध्यम से पात्र करदाताओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार राहत मिलती है और नगर निगम को पुराने बकाये की वसूली में मदद मिलती है। योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पात्र करदाताओं को जानकारी देना और बकाया कर से जुड़े मामलों का समय पर निस्तारण करना राजस्व संग्रह को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
नगर आयुक्त गौरव कुमार के नेतृत्व में राजस्व बढ़ाने पर जोर
हाउस टैक्स नगर निगम की आय का प्रमुख स्रोत है। इससे प्राप्त राजस्व शहर की सफाई, सड़क निर्माण, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में वसूली में बढ़ोतरी नगर निगम की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है।
नगर आयुक्त गौरव कुमार के नेतृत्व में सभी जोनों के सामने राजस्व संग्रह को गति देने और बेहतर परिणाम हासिल करने की चुनौती है। जोन-1 की रिकॉर्ड वृद्धि और जोन-4 की सर्वाधिक कुल वसूली इस बात को रेखांकित करती है कि प्रदर्शन का आकलन कुल संग्रह और पिछले वर्ष के मुकाबले हुई बढ़ोतरी, दोनों आधारों पर किया जाना चाहिए।
नौ अक्टूबर तक की तुलनात्मक रिपोर्ट में लखनऊ नगर निगम की कुल हाउस टैक्स वसूली में करीब 12 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल वसूली में जोन-4 ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि पिछले वर्ष के मुकाबले सर्वाधिक 7.24 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ जोन-1 सबसे आगे रहा। जोनल अधिकारी ओम प्रकाश और कर अधीक्षक अनुराग उपाध्याय के नेतृत्व में जोन-1 का यह प्रदर्शन उल्लेखनीय है। अब देखना होगा कि वित्तीय वर्ष के शेष महीनों में नगर निगम के अन्य जोन अपनी वसूली में कितना सुधार कर पाते हैं और राजस्व संग्रह को किस स्तर तक पहुंचाया जाता है।



