Lucknow-फैजुल्लागंज में बाढ़ के बीच नाव से पहुंचे डॉ. नीरज बोरा, दाउदनगर-मामा कॉलोनी में बांटी राहत सामग्री
मामा कॉलोनी में बाढ़ प्रभावित परिवारों को बांटी राहत सामग्री, अधिकारियों को राहत और स्वास्थ्य सेवाएं लगातार उपलब्ध कराने के निर्देश

फैजुल्लागंज में बाढ़ के बीच नाव से दाउदनगर पहुंचे विधायक डॉ. नीरज बोरा, घर-घर पहुंचकर जाना लोगों का हाल

मामा कॉलोनी में बाढ़ प्रभावित परिवारों को बांटी राहत सामग्री, अधिकारियों को राहत और स्वास्थ्य सेवाएं लगातार उपलब्ध कराने के निर्देश
Ritesh Srivastava
लखनऊ। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। नदी किनारे बसे दाउदनगर, मामा कॉलोनी और आसपास के इलाकों में जलभराव से प्रभावित लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। इसी बीच शनिवार को लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ. नीरज बोरा और विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ नाव से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे।
दोनों जनप्रतिनिधियों ने नाव के जरिए दाउदनगर और आसपास के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों के घर-घर पहुंचकर लोगों से बातचीत की और जलभराव के कारण सामने आ रही समस्याओं की जानकारी ली। अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति की जानकारी लेने के साथ ही प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
मामा कॉलोनी में बांटी गई राहत सामग्री
विधायक डॉ. नीरज बोरा ने मामा कॉलोनी पहुंचकर बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराई जा रही राहत सामग्री की किट वितरित की।
राहत किट में अरहर की दाल, भुना चना, लईया, बिस्कुट, माचिस, मोमबत्ती, चीनी, चावल, आटा, नमक, सरसों का तेल, रिफाइंड, मसाले, आलू और प्याज जैसी रोजमर्रा की आवश्यक खाद्य सामग्री शामिल है।
इसके अलावा प्रभावित परिवारों को सेनेटरी पैड, सूती कपड़ा, नहाने और कपड़े धोने का साबुन, डिस्पोजल बैग तथा बाल्टी जैसी उपयोगी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
स्वास्थ्य सुविधाओं की भी ली जानकारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान विधायक डॉ. नीरज बोरा ने लोगों से चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी जानकारी ली। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि जलभराव के बीच लोगों को स्वास्थ्य संबंधी किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित परिवारों की जरूरत के अनुसार राहत सामग्री, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक टीमों को लगातार सक्रिय रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने को कहा गया।
विधायक ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़ा है और बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है।
बार-बार जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान पर जोर
फैजुल्लागंज में हर वर्ष बारिश और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण सामने आने वाली जलभराव की समस्या को लेकर विधायक डॉ. नीरज बोरा ने स्थायी समाधान की बात कही।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बार-बार होने वाले जलभराव से लोगों को राहत दिलाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज (पक्का पुल) तक बांध निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। करीब 182 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रस्ताव को शासन को भेजा गया है।
विधायक ने कहा कि फैजुल्लागंज के नदी किनारे बसे लोगों की समस्या को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से भी बांध निर्माण की प्रक्रिया में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि बांध निर्माण की योजना आगे बढ़ने से भविष्य में नदी का जलस्तर बढ़ने अथवा भारी बारिश के दौरान फैजुल्लागंज के लोगों को बार-बार बाढ़ और जलभराव की समस्या से राहत मिल सकती है।
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लिया राहत कार्यों का जायजा
दौरे के दौरान जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति की समीक्षा की। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जरूरतों को समझने के साथ ही अधिकारियों को आवश्यकतानुसार राहत पहुंचाने पर जोर दिया गया।
इस दौरान रक्षा मंत्री भारत सरकार राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी, एडीएम राकेश कुमार सिंह, एडीएम एमपी सिंह, उप जिलाधिकारी सदर साहिल कुमार सहित प्रशासनिक अधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
फैजुल्लागंज के लिए बड़ा सवाल
गोमती नदी के किनारे बसे फैजुल्लागंज के दाउदनगर और मामा कॉलोनी जैसे इलाकों में जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ यहां रहने वाले परिवारों को हर बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज तक प्रस्तावित बांध को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। अब देखना होगा कि करीब 182 करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव पर शासन स्तर से कब तक निर्णय होता है और परियोजना धरातल पर कब उतरती है।



