लखनऊ

नहर रोड चौड़ीकरण: जीएसबी बिछी, लेकिन बिजली के पोल वहीं खड़े

‼️👉जानकीपुरम नहर रोड चौड़ीकरण में बड़ा सवाल: सड़क पहले बन रही, बिजली के पोल अब तक नहीं हटे

‼️👉सड़क पहले, पोल बाद में! जानकीपुरम नहर रोड परियोजना पर उठे सवाल

‼️👉PWD और बिजली विभाग में तालमेल का अभाव, नई सड़क पर मंडरा रहा नुकसान का खतरा

‼️👉करोड़ों की सड़क बनेगी, फिर खुदेगी? जानकीपुरम में पोल शिफ्टिंग पर बड़ा सवाल

‼️👉नहर रोड चौड़ीकरण: जीएसबी बिछी, लेकिन बिजली के पोल वहीं खड़े

रिपोर्ट-रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज

लखनऊ। जानकीपुरम के नहर रोड पर लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा सड़क चौड़ीकरण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य के बीच एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। सड़क के किनारे लगे विद्युत पोल अब तक स्थानांतरित नहीं किए गए हैं, जबकि नियमानुसार पहले पोल शिफ्टिंग का कार्य पूरा होना चाहिए था।

जानकारी के अनुसार, उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. नीरज बोरा तथा बीजेपी युवा नेता नीरज सिंहः द्वारा इस सड़क परियोजना का शुभारंभ किया गया था। यह सड़क सेंट मैरी हॉस्पिटल से होते हुए शुक्ला चौराहा के आगे 60 फीट मार्ग तक विकसित की जा रही है। परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए विद्युत पोलों को हटाने और स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत हुआ था।

 बिजली विभाग  सूत्रों के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग द्वारा विद्युत विभाग को पोल शिफ्टिंग के लिए निर्धारित धनराशि का 15 प्रतिशत जमा कर कार्य प्रारंभ करने की अनुमति प्राप्त कर ली गई थी। इसके बावजूद अभी तक मौके पर एक भी पोल स्थानांतरित नहीं किया गया है। वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण एजेंसी द्वारा जीएसबी (Granular Sub Base) डालकर सड़क को समतल करने का कार्य भी लगभग पूरा कर लिया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी स्थिति में सड़क का डामरीकरण कर दिया जाता है तो बाद में पोल हटाने के लिए फिर से सड़क खोदनी पड़ेगी, जिससे सरकारी धन की बर्बादी के साथ नई सड़क भी क्षतिग्रस्त होगी। लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या पोल शिफ्टिंग केवल कागजों तक सीमित है या धरातल पर भी इसका क्रियान्वयन होगा।

क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और विद्युत विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर समन्वय स्थापित करने तथा सड़क निर्माण से पहले पोल स्थानांतरण का कार्य पूरा कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में जनता को असुविधा और सरकारी संसाधनों की क्षति से बचाया जा सके।।

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