धूल में दम तोड़ता लखनऊ: बढ़ते प्रदूषण पर उठे सवाल, जिम्मेदारों की चुप्पी पर समाज सेवी विवेक शर्मा ने उठाया सवाल

धूल में दम तोड़ता लखनऊ: बढ़ते प्रदूषण पर उठे सवाल, जिम्मेदारों की चुप्पी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में बढ़ता प्रदूषण अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्था की ताजा रिपोर्ट में लखनऊ को दुनिया का 58वां सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है, जबकि देश के 259 शहरों में इसकी रैंक 34वीं है।

यह रिपोर्ट 143 देशों के 9,446 शहरों और 40 हजार से अधिक मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है। चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में 64 शहर भारत के हैं और उत्तर प्रदेश के 11 शहर भी इस सूची में शामिल हैं।
धूल बन रही बीमारी की जड़
शहर की सड़कों पर उड़ती धूल अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। यह धूल आंखों में जलन, सांस की तकलीफ और दमा जैसी बीमारियों को बढ़ावा दे रही है। इसके बावजूद कई इलाकों में नियमित सफाई व्यवस्था नदारद दिख रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाई आवाज

ग्रेटर लखनऊ जनकल्याण महासमिति के महासचिव और समाजसेवी लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
❗ नगर निगम पर सवाल
शहर में आधुनिक सफाई मशीनों के इस्तेमाल के बावजूद हालात जस के तस हैं। लोगों का आरोप है कि ये मशीनें सिर्फ “शो-पीस” बनकर रह गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर प्रभावी सफाई नहीं हो पा रही।
जनता की मांग
लोगों का कहना है कि अधिकारियों को जमीनी हकीकत समझने के लिए फील्ड में उतरना चाहिए। आम नागरिकों का मानना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी खुद सड़कों की स्थिति नहीं देखेंगे, तब तक सुधार मुश्किल है।
लखनऊ में तेजी से बढ़ता प्रदूषण और धूल भरी सड़कें अब जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुकी हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।



