लखनऊ नगर निगम के 2.24 लाख हाउस आईडी पर 776 करोड़ का बकाया, 278.59 करोड़ ब्याज माफी का रास्ता साफ
सबसे कम हाउस आईडी जोन-5 में

लखनऊ नगर निगम के 2.24 लाख हाउस आईडी पर 776 करोड़ का बकाया, 278.59 करोड़ ब्याज माफी का रास्ता साफ
ओटीएस योजना से बकायेदारों को बड़ी राहत, मूल बकाया जमा करने पर ब्याज और सरचार्ज में 100 प्रतिशत तक छूट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लागू की गई एकमुश्त समाधान योजना यानी ओटीएस ने लखनऊ नगर निगम के गृहकर बकायेदारों के लिए बड़ी राहत का रास्ता खोल दिया है। योजना के तहत पात्र बकायेदार यदि निर्धारित नियमों के अनुसार मूल बकाया जमा करते हैं तो बकाया पर लगा ब्याज और सरचार्ज माफ किया जा सकता है। योजना में अधिकतम तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा भी दी गई है।
लखनऊ नगर निगम की Opening Demand Report 2026-27 के जोनवार आंकड़ों के अनुसार नगर निगम के आठों जोन में कुल 2,24,749 हाउस आईडी ऐसी दर्ज हैं जिन पर कर भुगतान लंबित है। इन पर 4 अरब 97 करोड़ 41 लाख 85 हजार 980.97 रुपये यानी करीब 497.42 करोड़ रुपये का एरियर डिमांड दर्ज है। इसके अलावा इन बकायों पर 278 करोड़ 58 लाख 84 हजार 379.42 रुपये यानी करीब 278.59 करोड़ रुपये ब्याज दर्ज है।
यानी केवल एरियर और ब्याज को जोड़ें तो करीब 776.01 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। ओटीएस के दायरे में आने वाले मामलों में नियमों के अनुसार मूल धनराशि जमा करने पर इस ब्याज राशि में बड़ी राहत मिल सकती है।
जोनवार स्थिति
| जोन | हाउस आईडी | एरियर बकाया | ब्याज |
|---|---|---|---|
| जोन-1 | 19,865 | ₹98.65 करोड़ | ₹72.90 करोड़ |
| जोन-2 | 19,094 | ₹38.98 करोड़ | ₹27.61 करोड़ |
| जोन-3 | 39,088 | ₹50.73 करोड़ | ₹30.68 करोड़ |
| जोन-4 | 18,554 | ₹70.55 करोड़ | ₹19.36 करोड़ |
| जोन-5 | 11,862 | ₹23.49 करोड़ | ₹13.95 करोड़ |
| जोन-6 | 59,663 | ₹69.33 करोड़ | ₹48.90 करोड़ |
| जोन-7 | 23,864 | ₹47.96 करोड़ | ₹26.09 करोड़ |
| जोन-8 | 32,759 | ₹97.73 करोड़ | ₹39.11 करोड़ |
| कुल | 2,24,749 | ₹497.42 करोड़ | ₹278.59 करोड़ |
जोन-6 में सबसे ज्यादा हाउस आईडी
आंकड़ों के मुताबिक जोन-6 में सबसे अधिक 59,663 हाउस आईडी पर भुगतान लंबित है। इसके बाद जोन-3 में 39,088 और जोन-8 में 32,759 हाउस आईडी हैं।
वहीं एरियर बकाये के मामले में जोन-1 सबसे ऊपर है। जोन-1 में करीब 98.65 करोड़ रुपये का एरियर दर्ज है। इसके बाद जोन-8 में 97.73 करोड़, जोन-4 में 70.55 करोड़ और जोन-6 में 69.33 करोड़ रुपये का एरियर है।
ब्याज के मामले में भी जोन-1 सबसे आगे
बकाये पर लगने वाले ब्याज की बात करें तो जोन-1 में सबसे अधिक 72.90 करोड़ रुपये ब्याज दर्ज है। जोन-6 में 48.90 करोड़, जोन-8 में 39.11 करोड़ और जोन-3 में 30.68 करोड़ रुपये ब्याज दर्ज है।
जोन-3 में सबसे अधिक चालू वर्ष की मांग
Opening Demand Report में चालू वर्ष की मांग भी शामिल है। आठों जोन में कुल 724.77 करोड़ रुपये की Current Demand दर्ज है। इसमें सबसे अधिक मांग जोन-3 की 221.91 करोड़ रुपये है। इसके बाद जोन-4 में 155.05 करोड़ और जोन-1 में 111.91 करोड़ रुपये की चालू मांग दर्ज है।
🟢 सबसे कम हाउस आईडी जोन-5 में
वहीं सबसे कम लंबित हाउस आईडी जोन-5 में हैं। यहां कुल 11,862 हाउस आईडी पर भुगतान लंबित है।
इसके बाद जोन-4 में 18,554, जोन-2 में 19,094 और जोन-1 में 19,865 हाउस आईडी लंबित हैं।
यानी सबसे अधिक और सबसे कम लंबित हाउस आईडी वाले जोन के बीच करीब 47,801 हाउस आईडी का अंतर है।
Current Demand, Arrear Demand और Interest Demand को जोड़ने पर रिपोर्ट में आठों जोन की कुल मांग करीब 1,500.78 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि ओटीएस के संदर्भ में मुख्य फोकस 1 अप्रैल 2026 तक के पात्र बकाये पर है, इसलिए चालू वित्तीय वर्ष की मांग को ओटीएस राहत की राशि में सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।
278.59 करोड़ ब्याज की माफी बन सकती है बड़ी राहत
नगर निगम के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि बकायेदारों के ऊपर 278.59 करोड़ रुपये ब्याज दर्ज है। यदि पात्र भवन स्वामी ओटीएस की शर्तों के अनुसार मूल बकाया जमा करते हैं तो यह ब्याज राशि माफ होने से करदाताओं को बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है।
सरकार की योजना का उद्देश्य एक तरफ वर्षों से लंबित संपत्ति कर की वसूली करना है, वहीं दूसरी तरफ बकायेदारों को ब्याज और सरचार्ज की भारी देनदारी से राहत देकर मूल कर जमा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत गृहकर के साथ जलकर और सीवर कर के पात्र बकायों पर भी राहत का प्रावधान है।
लखनऊ नगर निगम के लिए भी यह योजना राजस्व वसूली का बड़ा अवसर है। यदि 2.24 लाख से अधिक लंबित हाउस आईडी में से बड़ी संख्या में करदाता ओटीएस का लाभ लेते हैं तो निगम को वर्षों से अटकी मूल धनराशि की वसूली में तेजी आ सकती है, जबकि करदाताओं को ब्याज की भारी रकम से राहत मिलेगी।



