मूसलाधार बारिश ने खोली लखनऊ नगर निगम की पोल
जानकीपुरम से गोमती नगर तक जलभराव का संकट, घरों में घुसा पानी; सड़कें बनीं तालाब

मूसलाधार बारिश ने खोली लखनऊ नगर निगम की पोल
जानकीपुरम से गोमती नगर तक जलभराव का संकट, घरों में घुसा पानी; सड़कें बनीं तालाब
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में बीती रात से हुई मूसलाधार बारिश ने नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। बारिश थमने के बाद भी शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जानकीपुरम, अलीगंज, गोमती नगर, सीतापुर रोड योजना सहित कई निचले इलाकों में सड़कें पानी में डूबी नजर आईं।
कई स्थानों पर हालात इतने खराब रहे कि लोगों की गाड़ियां सड़क पर भरे पानी में डूब गईं, जबकि कई घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रात से ही लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए। जरूरी सामान लेने के लिए कुछ लोगों को सामान्य आवागमन के बजाय ठेले का सहारा लेना पड़ा।
बारिश ने पूछे बड़े सवाल—आखिर नालों की सफाई कहां हुई?
लखनऊ में हर साल बारिश से पहले नालों की सफाई, सिल्ट हटाने और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं। लेकिन पहली ही तेज बारिश में कई इलाकों में जलभराव की तस्वीरें इन तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगह नालों पर अतिक्रमण है और समय से नालों की सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी निकल नहीं पा रहा है। सवाल यह है कि यदि नालों की सफाई और डी-सिल्टिंग का काम वास्तव में पूरा किया गया था तो बारिश के बाद पानी घंटों तक सड़कों और घरों में क्यों जमा रहा?
सीवर चोक, जिम्मेदारी किसकी?
जलभराव की समस्या के साथ कई इलाकों में सीवर चोक होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे में सीवर व्यवस्था और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाली सुएज कंपनी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि सीवर लाइनों की समय रहते सफाई और मॉनिटरिंग की जाती तो बारिश के दौरान स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
अब सवाल यह है कि नगर निगम और संबंधित एजेंसियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय यह बताएंगी कि सीवर लाइनें चोक क्यों हुईं और उनकी सफाई समय से क्यों नहीं कराई गई?
जलकल विभाग पर भी सवाल—घरों में पहुंच रहा गंदा पानी
बारिश और जलभराव के बीच कई इलाकों से घरों में आने वाले पानी को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों में साफ पानी के बजाय गंदा और दूषित पानी पहुंच रहा है।
यह स्थिति सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि गंभीर जनस्वास्थ्य का विषय है। जलभराव वाले इलाकों में यदि सीवर का पानी पेयजल पाइपलाइन के संपर्क में आता है तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
ऐसे में जलकल विभाग को तत्काल पानी के नमूने लेकर जांच कराने और प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की जरूरत है।
जानकीपुरम नहर रोड पर महीनों से बंद रास्ता, बारिश ने बढ़ाई मुसीबत
जानकीपुरम नहर रोड पर जल निगम द्वारा गहरी सीवर लाइन डालने का कार्य लंबे समय से चल रहा है। निर्माण कार्य के कारण रास्ता पहले से ही बाधित है और स्थानीय लोगों के सामने आवागमन की समस्या बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय से सड़क बाधित होने के बावजूद आवागमन के लिए पर्याप्त वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
अब बारिश के बाद जब मुख्य रास्ता पानी और कीचड़ से भर गया है, तब स्थानीय लोगों के लिए निकलना और भी मुश्किल हो गया है।
सिर्फ बारिश जिम्मेदार है या व्यवस्था भी?
बारिश प्राकृतिक घटना है, लेकिन बारिश के बाद शहर का डूब जाना सिर्फ मौसम की मजबूरी मानकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
यदि नाले साफ हों, अतिक्रमण हटाया गया हो, पंपिंग व्यवस्था सक्रिय हो, सीवर लाइनें चालू हों और जल निकासी के संवेदनशील स्थानों की पहले से पहचान हो तो जलभराव की अवधि और प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है।
यही वजह है कि अब सवाल सीधे जिम्मेदार विभागों से पूछा जाना चाहिए—
बारिश से पहले नालों की सफाई के दावे कितने सही थे?
कितने नालों से सिल्ट हटाई गई?
कितने अतिक्रमण हटाए गए?
कितने जलभराव वाले स्थानों पर पंप लगाए गए?
सीवर लाइनों की सफाई और डी-सिल्टिंग कब हुई?
जलभराव के बावजूद घरों में गंदा पानी पहुंचने की जिम्मेदारी किसकी है?
और सबसे बड़ा सवाल—
हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लखनऊ पहली तेज बारिश में क्यों डूब जाता है?
अधिकारी फील्ड में उतरे, लेकिन सवाल व्यवस्था का है
बारिश के बाद कुछ जोन में नगर निगम के अधिकारी फील्ड पर निकले और जलभराव वाले क्षेत्रों का जायजा लिया। मौके पर कर्मचारियों को जलनिकासी और राहत कार्यों में लगाया गया।
लेकिन जनता का सवाल यह है कि अधिकारी बारिश शुरू होने के बाद ही क्यों सक्रिय होते हैं? संवेदनशील इलाकों में बारिश से पहले ही निरीक्षण, नालों की सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं की जाती?
मौसम विभाग ने भी लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। ऐसे में नगर निगम, जलकल, जल निगम और सीवर व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के सामने अब अगली बारिश से पहले व्यवस्था सुधारने की बड़ी चुनौती है।
जनता को चाहिए जलभराव से मुक्ति, सिर्फ दावे नहीं
लखनऊ को स्मार्ट सिटी और आधुनिक राजधानी बनाने के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन जब नागरिकों को बारिश के बाद घर से निकलने के लिए ठेले का सहारा लेना पड़े, सड़क पर गाड़ियां डूब जाएं और घरों में पानी घुस जाए, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जरूरत बारिश के बाद फोटो खिंचवाने की नहीं, बारिश से पहले स्थायी जलनिकासी व्यवस्था बनाने की है।
नगर निगम को चाहिए कि वह जलभराव वाले सभी संवेदनशील स्थानों की सूची सार्वजनिक करे, नालों की सफाई का वास्तविक रिकॉर्ड सामने रखे, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करे और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करते हुए जवाबदेही सुनिश्चित करे।
क्योंकि लखनऊ की जनता हर साल बारिश में यही सवाल नहीं पूछना चाहती—“पानी कब निकलेगा?”
जनता जानना चाहती है—“बारिश आने से पहले व्यवस्था क्यों नहीं की गई?”
— STAR NEWS BHARAT / Starnewsbharat.com, लखनऊ



