राजाजीपुरम से अलीगंज तक खुली पानी टंकियां: ‘नंबर-1’ दावों के बीच दूषित पानी पीने को मजबूर लोग
फॉलोअप रिपोर्ट | लखनऊ जलकल पर बड़ा खुलासा

फॉलोअप रिपोर्ट | लखनऊ जलकल पर बड़ा खुलासा
राजाजीपुरम से अलीगंज तक खुली पानी टंकियां: ‘नंबर-1’ दावों के बीच दूषित पानी पीने को मजबूर लोग

लखनऊ। राजधानी में पेयजल व्यवस्था को लेकर पहले सामने आई राजाजीपुरम की चौंकाने वाली तस्वीर के बाद अब जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। स्टार न्यूज़ भारत द्वारा पहले प्रकाशित खबर में राजाजीपुरम की खुली पानी टंकी से करीब 5 हजार घरों में दूषित पानी सप्लाई होने का मामला उजागर हुआ था। अब इसी पड़ताल में अलीगंज स्थित जोन-3 जलकल कार्यालय के सामने बनी ओवरहेड पानी की टंकी की भी गंभीर लापरवाही सामने आई है।
ताजा तस्वीरों और स्थानीय जानकारी के अनुसार अलीगंज की टंकी का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त है, जिससे उसमें गंदगी जाने की पूरी आशंका है। इलाके में बंदरों का जमावड़ा और पक्षियों की आवाजाही आम है, ऐसे में टंकी में मल-मूत्र और अन्य गंदगी मिलकर पानी को दूषित कर सकती है। यही पानी हजारों घरों में पेयजल के रूप में पहुंच रहा है, जो लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

इससे पहले राजाजीपुरम में ड्रोन सर्वे के दौरान बिना ढक्कन की टंकी सामने आई थी, जिसमें पक्षियों का बैठना, कीड़े-मकोड़े दिखना और गंदगी गिरना जैसी गंभीर स्थितियां देखी गई थीं। स्थानीय पार्षद गौरी साँवरिया ने इस मुद्दे को कई बार नगर निगम के समक्ष उठाया और सदन में भी मामला रखा, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
अब दो अलग-अलग इलाकों में एक जैसी लापरवाही सामने आने से जलकल विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद यदि पेयजल जैसी बुनियादी सेवा में इस स्तर की अनदेखी हो रही है, तो यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।
प्रदेश सरकार जहां ‘हर घर नल’ और शहर को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर इन व्यवस्थाओं की निगरानी कौन कर रहा है और जिम्मेदार अधिकारी अब तक क्यों सक्रिय नहीं हुए।
फिलहाल हजारों लोग ऐसे पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं, जो बीमारियों का कारण बन सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ठोस कार्रवाई करता है या फिर ‘नंबर-1 शहर’ के दावों के बीच यह सच्चाई भी दबकर रह जाती है।
वही इस मामले को लेकर ग्रेटर लखनऊ जनकल्याण महासमिति के महासचिव व समाज सेवी विवेक शर्मा ने उक्त मामले को लेकर ट्वीट करते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए है



