लखनऊ नगर निगम विवाद पर विराम, सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को महापौर ने दिलाई शपथ

लखनऊ नगर निगम की सियासत में बड़ा घटनाक्रम
वार्ड-73 फैजुल्लागंज से ललित किशोर तिवारी ने पार्षद पद की ली शपथ
लखनऊ नगर निगम की राजनीति में पिछले कई महीनों से चल रहे विवाद के बीच रविवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से समाजवादी पार्टी के पार्षद निर्वाचित घोषित किए गए ललित किशोर तिवारी ने आखिरकार पार्षद पद की शपथ ग्रहण कर ली। उन्हें लखनऊ की मेयर Sushma Kharkwal ने शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण के साथ ही नगर निगम में लंबे समय से चला आ रहा संवैधानिक और राजनीतिक विवाद फिलहाल समाप्त होता दिखाई दे रहा है। यह वही मामला है, जिसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मेयर के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज करने तक की सख्त टिप्पणी की थी।
मामले की शुरुआत तब हुई थी जब चुनाव न्यायाधिकरण ने दिसंबर 2025 में वार्ड-73 फैजुल्लागंज से तत्कालीन भाजपा पार्षद प्रदीप शुक्ला का निर्वाचन निरस्त करते हुए सपा प्रत्याशी Lalit Kishore Tiwari को निर्वाचित घोषित किया था। न्यायाधिकरण ने पाया था कि नामांकन और संपत्ति संबंधी जानकारी में गंभीर विसंगतियां थीं।
हालांकि न्यायाधिकरण के आदेश के बाद भी करीब पांच महीने तक ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहुंचा। कोर्ट ने पहले नगर निगम प्रशासन से जवाब तलब किया और फिर आदेश का पालन न होने पर कड़ा रुख अपनाया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि निर्वाचित प्रतिनिधि को शपथ से वंचित रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मेयर सुषमा खर्कवाल के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार अस्थायी रूप से सीज कर दिए थे। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि जब तक निर्वाचित पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक यह आदेश प्रभावी रहेगा। इस फैसले के बाद लखनऊ नगर निगम और प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी।
सूत्रों के अनुसार, कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम प्रशासन ने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को तेज किया। यहां तक कि मेयर के स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में भी शपथ कराने की वैकल्पिक तैयारी की चर्चा सामने आई थी।
रविवार को हुए शपथ ग्रहण कार्यक्रम में नगर निगम के अधिकारी, पार्षद और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। शपथ के बाद ललित किशोर तिवारी ने कहा कि यह लोकतंत्र और न्यायपालिका की जीत है तथा वे क्षेत्र की जनता के विकास और मूलभूत सुविधाओं के मुद्दों को प्राथमिकता देंगे।
वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला नगर निकायों में संवैधानिक प्रक्रियाओं, न्यायिक आदेशों के पालन और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर एक बड़ा उदाहरण बन गया है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और मेयर के सीज अधिकारों पर होने वाले अगले निर्णय पर टिकी हैं।



