सृष्टि_स्मृति अपार्टमेंट बनाम एलडीए विवाद: एलडीए-बिल्डर की कथित साठगांठ पर आवंटियों का हंगामा, ‘वार्ता’ को बताया लीपापोती का प्रयास

सृष्टि और स्मृति अपार्टमेंट विवाद: एलडीए-बिल्डर की कथित साठगांठ पर आवंटियों का हंगामा, ‘वार्ता’ को बताया लीपापोती का प्रयास
लखनऊ। जानकीपुरम के कुर्सी रोड स्थित सृष्टि अपार्टमेंट और स्मृति अपार्टमेंट के आवंटियों ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और बिल्डर पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। आवंटियों का आरोप है कि दोनों अपार्टमेंट्स के बीच स्थित 18 मीटर चौड़ी सार्वजनिक सड़क और आरक्षित ग्रीन बेल्ट की भूमि पर नियमों की अनदेखी कर व्यावसायिक भूखंड विकसित करने का प्रयास किया गया।
आवंटियों का कहना है कि इस प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचने के बाद एलडीए प्रशासन ने बिल्डर और शिकायतकर्ताओं को सुनवाई के लिए बुलाया, लेकिन पीड़ित पक्ष ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे मामले की “लीपापोती” का प्रयास बताया है। उनका तर्क है कि जब एलडीए स्वयं इस मामले में निर्णय लेने वाला प्राधिकरण है, तब शिकायतकर्ताओं को बिल्डर के साथ वार्ता की मेज पर बैठाना उचित नहीं है।
निवासियों का यह भी आरोप है कि पूर्व में एलडीए के निर्देश पर हटाई गई कथित अवैध बाउंड्री वॉल दोबारा खड़ी कर दी गई और वहां निर्माण कार्य जारी रहा, लेकिन संबंधित लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही, मूल ले-आउट प्लान और स्वीकृत मानचित्र की प्रतियां उपलब्ध न कराए जाने पर आवंटियों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्रथम अपील भी दायर की है।
आवंटियों का कहना है कि एलडीए की जांच समिति पहले ही स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुकी है, इसलिए अब केवल वार्ता कराना समस्या के समाधान के बजाय उसे टालने का प्रयास प्रतीत होता है।
आवंटियों की प्रमुख मांगें हैं:
- सार्वजनिक सड़क और ग्रीन बेल्ट को मूल स्वीकृत ले-आउट के अनुसार तत्काल बहाल किया जाए।
- कथित अवैध निर्माण हटाकर बाउंड्री वॉल का पुनर्निर्माण कराया जाए।
- मामले में दोषी पाए जाने वाले बिल्डर और संबंधित एलडीए अधिकारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
- पूरे प्रकरण की कमिश्नर स्तर या विजिलेंस से निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
फिलहाल इस मामले में एलडीए की ओर से आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्राधिकरण इस विवाद और लगाए गए आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई करता है।



