उत्तर प्रदेशलखनऊ

Lucknow:‼️👉ओवरलोड, जर्जर तार और वर्टिकल व्यवस्था… आखिर क्यों चरमरा रही राजधानी की बिजली व्यवस्था?

‼️👉आखिर ई रिक्शा और EV वाहन की चार्जिंग कहा हो रही

‼️👉ओवरलोड, जर्जर तार और वर्टिकल व्यवस्था… आखिर क्यों चरमरा रही राजधानी की बिजली व्यवस्था?

‼️👉आखिर ई रिक्शा और EV वाहन की चार्जिंग कहा हो रही

रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज

भीषण गर्मी में राजधानी लखनऊ की विद्युत व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। जगह-जगह ट्रांसफार्मर फुंकने, तार जलने और घंटों बिजली कटौती के पीछे केवल बढ़ती मांग ही जिम्मेदार नहीं, बल्कि विभागीय योजना और तकनीकी निगरानी की कमी भी बड़ा कारण बनती जा रही है।

सबसे अहम मुद्दा यह है कि राजधानी में बीते कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक वाहन, एसी, हाईलोड मशीनें और व्यावसायिक उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन उसके अनुरूप बिजली लोड का सत्यापन और अपग्रेडेशन जमीनी स्तर पर नहीं हो पाया। सवाल यह उठ रहा है कि जिन घरों और प्रतिष्ठानों में निर्धारित क्षमता से अधिक बिजली खपत हो रही है, वहां बिजली विभाग द्वारा नियमित तकनीकी निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते लोड ऑडिट, स्मार्ट सर्वे और कनेक्शन सत्यापन अभियान पारदर्शिता के साथ चलाया जाता तो आज विद्युत नेटवर्क पर इतना दबाव नहीं पड़ता। कई इलाकों में घरेलू कनेक्शन पर व्यावसायिक उपयोग और अनधिकृत हाईलोड उपकरणों के चलते लोकल फीडर और ट्रांसफार्मर लगातार ओवरलोड हो रहे हैं।

दूसरी बड़ी चिंता आरडीएसएस योजना के तहत बदले गए बिजली तारों और उपकरणों को लेकर सामने आ रही है। प्रदेशभर में करोड़ों रुपये खर्च कर बदले गए केबल और लाइनें अब कई क्षेत्रों में बार-बार फुंक रही हैं। लगातार तार जलने और फॉल्ट बढ़ने से गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लाइन बदलना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, लोड कैपेसिटी और समय-समय पर थर्मल मॉनिटरिंग भी जरूरी है।

वहीं “वर्टिकल व्यवस्था” को लेकर भी कर्मचारियों और उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की संख्या घटने के बाद अब सीमित कर्मचारियों पर कई किलोमीटर क्षेत्र की जिम्मेदारी डाल दी गई है। कई स्थानों पर 3 से 4 कर्मचारियों को 8 से 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र में फॉल्ट सुधारने भेजा जा रहा है, जिससे समय पर सप्लाई बहाल करना बेहद कठिन हो गया है।

बिजली कर्मचारियों का कहना है कि भीषण गर्मी, ओवरलोड और सीमित स्टाफ के बीच लगातार काम करने के बावजूद जनता का गुस्सा सीधे फील्ड स्टाफ पर उतर रहा है। ऐसे में जरूरत केवल अस्थायी सुधार की नहीं, बल्कि तकनीकी ऑडिट, मैनपावर बढ़ाने, लोड मैनेजमेंट और जमीनी निगरानी को मजबूत करने की है, ताकि राजधानी की विद्युत व्यवस्था स्थायी रूप से पटरी पर लौट सके।

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