लखनऊ में कबाड़ियों पर मेहरबान नगर निगम! करोड़ों का कारोबार, टैक्स वसूली ZERO—कौन दे रहा संरक्षण?

रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज
लखनऊ। की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां नगर निगम शहर में नर्सिंग होम, शराब की दुकान, होटल-रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से नियमित रूप से ट्रेडिंग शुल्क वसूल रहा है, वहीं कबाड़ी कारोबार पर कथित तौर पर नरमी बरती जा रही है।
जानकारी के अनुसार नगर निगम के सभी आठों जोनों में सैकड़ों की संख्या में कबाड़ी दुकानें और बड़े गोदाम संचालित हो रहे हैं, जहां लोहे, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक कचरे समेत विभिन्न प्रकार के कबाड़ की खरीद-फरोख्त होती है। इस कारोबार में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का लेन-देन होने का अनुमान है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम को इस सेक्टर से अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है।
सूत्रों का कहना है कि कई स्थानों पर कबाड़ी दुकानें बिना वैध लाइसेंस के संचालित हो रही हैं और आवासीय क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर कबाड़ का भंडारण किया जा रहा है। इसके चलते जहां एक ओर राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आगजनी, प्रदूषण और सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नगर निगम इस क्षेत्र को व्यवस्थित कर सभी कबाड़ी दुकानों का पंजीकरण और लाइसेंस अनिवार्य कर दे, तो निगम को हर वर्ष करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।
इन पर लगता है ट्रेड शुल्क

इस बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अन्य व्यवसायों पर सख्ती से नियम लागू किए जा रहे हैं, तो कबाड़ी कारोबार को अब तक इस दायरे में पूरी तरह क्यों नहीं लाया गया। नगर निगम की ओर से इस मामले में अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



