लखनऊ

करोड़ों के सौंदर्यीकरण पर ठेला माफियाओं का कब्जा भारी! कुर्सी रोड पर जनता पूछ रही- आखिर जिम्मेदार कौन?

नगर निगम जोन 3 व गुडम्बा पुलिस की बड़ी लापरवाही से लग रहा अतिक्रमण

करोड़ों के सौंदर्यीकरण पर ठेला माफियाओं का कब्जा भारी! कुर्सी रोड पर जनता पूछ रही- आखिर जिम्मेदार कौन?

लखनऊ। राजधानी की कुर्सी रोड पर सड़क चौड़ीकरण और फुटपाथ सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फुटपाथों पर आज भी अवैध ठेलों का कब्जा कायम है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आम नागरिक फुटपाथ पर चल ही नहीं सकता, तो फिर सौंदर्यीकरण का लाभ किसे मिल रहा है?

लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आने वाली इस स्टेट हाईवे सड़क पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा बड़े पैमाने पर निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य कराया जा रहा है। लेकिन सड़क किनारे फुटपाथों पर फल और सब्जी के ठेलों की कतारें अधिकारियों के दावों की पोल खोल रही हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। सुबह से लेकर देर शाम तक फुटपाथों पर ठेलों का कब्जा रहता है, जिससे पैदल चलने वाले लोग मजबूरन सड़क पर उतरते हैं और जाम व हादसों का खतरा बढ़ जाता है।

लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन अतिक्रमण हटाने में असफल है तो फिर फुटपाथ सौंदर्यीकरण पर जनता का पैसा खर्च करने का औचित्य क्या है? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या राजनीतिक संरक्षण और अधिकारियों की उदासीनता के चलते ठेला माफियाओं के हौसले बुलंद हैं?

कुर्सी रोड पर रोजाना लगने वाले जाम से परेशान नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। जनता अब जानना चाहती है कि आखिर इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है—LDA, PWD या फिर अतिक्रमण पर आंख मूंदे बैठे जिम्मेदार अधिकारी?

जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है वह ऐसी  में आराम कर रहे हैं लखनऊ नगर निगम जोन 3 के अधिकारी सड़कों पर निकल कर यह नहीं देखे कि अतिक्रमण कहां पर है इसमें बड़ी लापरवाही लखनऊ नगर निगम जोन 3 व स्थानीय थाना गुडंबा की बताई जा रही है लखनऊ के समाज सेवी  विवेक शर्मा ने इस मामले को ट्वीट कर अपनी प्रक्रिया व्यक्त की है

“करोड़ों का सौंदर्यीकरण फेल! कुर्सी रोड के फुटपाथों पर ठेला माफियाओं का राज,”

फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए बने या अवैध कब्जेदारों के लिए? करोड़ों खर्च के बाद भी जाम और अतिक्रमण से नहीं मिली राहत।

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