:बात का बतंगड़ : नगर निगम के एक जोन में जूनियर का राज, सीनियर परेशान! अब कौन करेगा समाधान या होके रहेगा घमासान

बात का बतंगड़ जोन में जूनियर का राज, सीनियर परेशान!
लखनऊ नगर निगम के एक जोन में इन दिनों प्रशासनिक विज्ञान का ऐसा प्रयोग चल रहा है, जिसे देखकर बड़े-बड़े मैनेजमेंट गुरु भी नोट्स बनाने लगें।
कहते हैं कि साहब पद से तो जोनल अधिकारी हैं, लेकिन अनुभव और वरिष्ठता के हिसाब से उनके नीचे बैठे कई अफसर उनसे काफी आगे हैं। नतीजा यह है कि दफ्तर में फाइल कम और “सीनियर-जूनियर” का गणित ज्यादा चलता है।
चर्चा है कि जब भी कोई वरिष्ठ अधिकारी अपनी राय रखने की कोशिश करता है, साहब उसे ऐसे देखते हैं जैसे स्कूल का मॉनिटर प्रिंसिपल को अनुशासन सिखाने आ गया हो।
कर्मचारियों का दावा है कि साहब की फटकार में भी अद्भुत विविधता है। कभी आकाश का उदाहरण, कभी पाताल का, कभी ब्रह्मांड का। सुनने वाला यह भूल जाता है कि उसे नोटशीट लिखनी थी या खगोल विज्ञान का शोधपत्र।
जोन के गलियारों में यह भी चर्चा है कि जब से एक पीसीएस अधिकारी का तबादला हुआ, तब से कुर्सी पर बैठे साहब का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। हालत यह है कि कई कर्मचारी साहब के कमरे में जाने से पहले पानी पीते हैं, भगवान का नाम लेते हैं और फिर प्रवेश करते हैं।
कहते हैं साहब ओशो भक्त भी हैं। सुबह जय श्रीराम और दिन में जय प्रशासन! लेकिन अधीनस्थों का कहना है कि साहब के “दिव्य उपदेश” सुनने के बाद कई लोग सीधे मंदिर का रास्ता पकड़ लेते हैं।
सूत्र बताते हैं कि कई बार जोन में माहौल इतना गरमा गया कि लगा अब फाइलें नहीं, ईंट-गम्मे चलेंगे। हालांकि हर बार समझदार लोगों ने बीच-बचाव कर लिया और सरकारी संपत्ति को बचा लिया।
रसूख की चर्चाएं भी कम नहीं हैं। दफ्तर में कुछ लोग दावा करते हैं कि साहब किसी से नहीं डरते। यहां तक कि उनका आत्मविश्वास देखकर घड़ी भी समय बताने से पहले अनुमति मांग ले।
लेकिन पिछले दिनों जनगणना कार्य में लापरवाही को लेकर नगर आयुक्त ने जब अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई, तो जोन के गलियारों में अचानक सन्नाटा छा गया। अब कर्मचारी धीरे-धीरे पूछ रहे हैं—
“साहब की क्लास तो सबने बहुत देखी, लेकिन इस बार साहब की क्लास किसने ली?”
बाकी… जोन की हवा का रुख बदल रहा है या नहीं, यह आने वाले दिनों में फाइलें ही बताएंगी! 😉🖋️ फिलहाल ये सारी जानकारी कर्मचारियो के बतकही में सुनी गई है
हलाकि कुछ विभीषण टाइप के लोगो का कहना है कि अगर ऐसे रहा तो महाभारत तो जरूर होगा



