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लखनऊ नगर निगम का बड़ा कमाल: ₹1665 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली, जोन-4 नंबर वन, जोन-8 फिसला

📰 लखनऊ नगर निगम का बड़ा कमाल: ₹1665 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली, जोन-4 नंबर वन, जोन-8 फिसला

लखनऊ। ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में इतिहास रचते हुए ₹1665 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली कर सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। पिछले वर्ष के ₹1330 करोड़ के मुकाबले इस बार ₹335 करोड़ की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो नगर निगम की अब तक की सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है।

वसूली अभियान के दौरान जोन-4 सबसे आगे रहा, जहां से अकेले ₹160 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। इस बढ़त में हाईकोर्ट से मिले करीब ₹35 करोड़ की वसूली ने अहम भूमिका निभाई। वहीं पिछले साल का टॉप पर रहने वाला जोन-8 इस बार पिछड़ गया और उसकी वसूली घटकर ₹105 करोड़ पर सिमट गई, जिसे लेकर अब जिम्मेदारी तय करने की चर्चा तेज हो गई है।

नगर निगम ने इस वर्ष हाउस टैक्स के लक्ष्य ₹625 करोड़ को भी पीछे छोड़ते हुए ₹720 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली दर्ज की। खास बात यह रही कि वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन ही करीब ₹100 करोड़ की भारी वसूली की गई, जिसमें और जैसे बड़े संस्थानों से भुगतान शामिल रहा।

सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि प्रचार, पार्किंग रेंट और यूजर चार्ज जैसे अन्य स्रोतों से भी नगर निगम की आय में जबरदस्त इजाफा हुआ, जिससे कुल राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

इस पूरी प्रक्रिया में नगर आयुक्त की सक्रिय भूमिका देखने को मिली। बताया जा रहा है कि वह खुद देर रात तक मुख्यालय में बैठकर वसूली अभियान की लगातार मॉनिटरिंग करते रहे, जिससे टीम का प्रदर्शन बेहतर हुआ।

नगर निगम की इस सफलता के पीछे डिजिटल पेमेंट सिस्टम और मजबूत टीमवर्क को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। हालांकि, जहां एक ओर निगम ने रिकॉर्ड बनाकर नई उपलब्धि हासिल की है, वहीं जोन-8 की गिरावट अब बड़ा सवाल बन गई है कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है और क्या जवाबदेही तय होगी।

जोन 3 ने भी इस बार अच्छा प्रदर्शन कर 90 करोड़ की वसूली की जो कि पिछले वित्तीय वर्ष से अधिक है

जोनवार वसूली

जोन 1
₹1,07,92,27,621

जोन 2
₹52,81,88,378

जोन 3
₹93,60,46,333

जोन 4
₹1,59,94,36,295

जोन 5
₹55,03,17,754

जोन 6
₹65,09,28,436

जोन 7
₹61,51,24,829

जोन 8
₹1,13,13,65,645

कुल वसूली:
7,09,06,35,292

सबसे ज्यादा वसूली:
1️⃣ जोन 4 – ₹159 करोड़

2️⃣ जोन 8 – ₹113 करोड़

3️⃣ जोन 1 – ₹107 करोड़

कुल मिलाकर, लखनऊ नगर निगम की यह उपलब्धि प्रशासनिक रणनीति और सख्त निगरानी का बड़ा उदाहरण है, लेकिन आने वाले समय में सभी जोनों के संतुलित प्रदर्शन पर फोकस करना चुनौती रहेगा।

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