नगर निगम पार्किंग खेल का ‘मास्टरमाइंड’ बना बाबू, महापौर का फूटा गुस्सा- कहा “शहर की इज्जत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

🚨 पार्किंग खेल का ‘मास्टरमाइंड’ बना बाबू, महापौर का फूटा गुस्सा
लखनऊ: नगर निगम की पार्किंग व्यवस्था में फैले घालमेल का असली चेहरा अब खुलकर सामने आ गया है—और इसकी जड़ में बैठा है एक ‘चालाक बाबू’, जिसने पूरे सिस्टम को अपनी मर्जी से मोड़ डाला। शनिवार को स्मार्ट सिटी कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में महापौर सुषमा खर्कवाल का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने साफ कह दिया—“अब खेल खत्म, जिम्मेदारों पर सीधी कार्रवाई होगी।”
बाबू के खेल ने बिगाड़ी पूरी व्यवस्था
सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम के एक बाबू ने टेंडर प्रक्रिया में ऐसी ‘सेटिंग’ की कि एक ही व्यक्ति को दो-दो, तीन-तीन पार्किंग स्थलों का ठेका थमा दिया गया। नियमों को दरकिनार कर यह खेल लंबे समय से चल रहा था, जिससे न सिर्फ राजस्व को चूना लगा बल्कि पूरे शहर की व्यवस्था भी चरमराई।
निरीक्षण में खुली पोल, पार्किंग बनी अवैध अड्डा
महापौर के औचक निरीक्षण में हजरतगंज और केडी सिंह बाबू स्टेडियम के सामने की मल्टीलेवल पार्किंग की हालत बेहद खराब मिली।
- जगह-जगह गंदगी का अंबार
- पार्किंग में अवैध कार बाजार
- गैराज का संचालन
यानी जहां वाहन खड़े होने चाहिए थे, वहां खुलेआम धंधा चल रहा था—और जिम्मेदार आंख मूंदे बैठे थे।
“शहर की इज्जत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”
महापौर ने दो टूक कहा कि हजरतगंज जैसे पॉश इलाके में देश-विदेश से लोग आते हैं। ऐसी बदहाल पार्किंग न सिर्फ प्रशासन की नाकामी दिखाती है, बल्कि लखनऊ की छवि को भी धूमिल करती है।
सबलेटिंग पर सख्त वार
बैठक में खुलासा हुआ कि पार्किंग ठेकेदारों ने आगे अवैध रूप से सबलेटिंग कर रखी है। इस पर महापौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—
👉 “टेंडर नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
अब कार्रवाई तय
महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- टेंडर घोटाले में शामिल बाबू की भूमिका की जांच हो
- अवैध सबलेटिंग तुरंत बंद कराई जाए
- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो
- पार्किंग स्थलों की सफाई और व्यवस्था तत्काल सुधारी जाए
साफ संदेश: ‘बाबूगिरी’ अब नहीं चलेगी
इस पूरे मामले ने एक बार फिर नगर निगम के अंदर बैठे ‘सिस्टम के खिलाड़ियों’ को बेनकाब कर दिया है। महापौर के सख्त तेवर साफ संकेत दे रहे हैं कि अब पर्दे के पीछे खेल खेलने वालों की खैर नहीं।
👉 लखनऊ की पार्किंग व्यवस्था में सुधार होगा या फिर ‘बाबूगिरी’ फिर से हावी होगी—इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।



