मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) की प्रगति की समीक्षा:
प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग, डॉक्टर एम के शनमुगा सुंदरम् द्वारा अवगत कराया गया है कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) के अंतर्गत प्रतिष्ठानों के पंजीकरण की प्रगति एवं क्रियान्वयन की समीक्षा 18 मार्च 2026 को परियोजना निगरानी समूह द्वारा, जिसकी अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा की गई।
समीक्षा में योजना के अंतर्गत जनपदवार पंजीकरण में उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला गया। जहाँ कई जनपदों ने सराहनीय प्रगति प्रदर्शित की है, वहीं लंबित पंजीकरण वाले जनपदों पर समयबद्ध एवं पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने हेतु विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
समीक्षा के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
उत्तर प्रदेश में कुल 53,768 अंशदायी प्रतिष्ठानों के सापेक्ष 17.03.2026 तक 34,785 प्रतिष्ठानों का PMVBRY के अंतर्गत पंजीकरण हो चुका है, जो समग्र राज्य स्तर पर 65% की प्रगति दर्शाता है। ईस प्रकार पंजीकृत प्रतिष्ठानों के माध्यम से कुल 3,05,129 नवीन सदस्य एवं 8,86,319 पुनर्योजनी सदस्य नामांकित किए गए हैं।
जनपदवार पंजीकरण प्रगति:
विभिन्न जनपदों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। अग्रणी प्रदर्शन करने वाले जनपदों में आग्रा 80% (1915/2403 प्रतिष्ठान) के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद कासगंज (74%), फिरोजाबाद (70%), अलीगढ़ (69%), मथुरा (66%), गौतम बुद्ध नगर (75%) एवं उन्नाव (75%) हैं। गौतम बुद्ध नगर अकेले 1,39,769 नवीन सदस्य एवं 4,94,307 पुनर्योजनी सदस्यों के नामांकन का केंद्र रहा है।
पंजीकरण लंबितता:
समग्र उत्तर प्रदेश में 16,560 अंशदायी प्रतिष्ठान PMVBRY के अंतर्गत अभी तक अपंजीकृत हैं। लंबितता की स्थिति, गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत, निम्नवत है:
69 जनपदों में 20 से ज्यादा लंबित अपंजीकृत अंशदायी प्रतिष्ठान हैं |
सर्वाधिक लंबितता वाले जनपद, जिन पर तात्कालिक ध्यान आवश्यक है: गौतम बुद्ध नगर (2,320), लखनऊ (1,465), गाज़ियाबाद (1,591), कानपुर नगर (961), अल्लाहाबाद (483), वाराणसी (704), गोरखपुर (389), मेरठ (676), बुलंदशहर (441) एवं आग्रा (388)।
इसके अतिरिक्त, समग्र उत्तर प्रदेश में 1,792 अंशदायी प्रतिष्ठानों में 01.08.2025 से 05.09.2025 के मध्य नवीन सदस्य अथवा पुनर्योजनी सदस्य दर्ज हैं, किंतु अभी तक PMVBRY के अंतर्गत पंजीकृत नहीं हुए हैं। ये एक उच्च-प्राथमिकता श्रेणी है जिसमें तत्काल पहुँच आवश्यक है, सर्वाधिक सांद्रता गौतम बुद्ध नगर (459), लखनऊ (196), गाज़ियाबाद (182), सोनभद्रा (60) एवं वाराणसी (81) में है।
जनपद प्रशासन के साथ समन्वय:
परियोजना निगरानी समूह ने अवलोकन किया कि 25 जनपदों को आच्छादित करते हुए मंडलायुक्त स्तर पर क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (RPFC) एवं सहायक भविष्य निधि आयुक्त (APFC) की अनेक बैठकें आयोजित की गईं।
41 जनपदों के जिलाधिकारियों (DM)/मुख्य विकास अधिकारी(CDO) के साथ EPFO अधिकारियों द्वारा समन्वय बैठकें आयोजित की गईं, जिनसे कार्यान्वयन में तेजी लाई जा सके।
समीक्षा में यह भी रेखांकित किया गया कि योजना के उद्देश्यों को निर्धारित समयसीमा में प्राप्त करने हेतु EPFO के क्षेत्रीय कार्यालयों एवं जनपद प्रशासन के बीच सतत समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
जनपद अधिकारियों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण एवं लाभार्थियों के नामांकन में वृद्धि हेतु अपने प्रयासों को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं, विशेष रूप से उच्च-लंबितता वाले जनपदों एवं NJ/RJ गतिविधि वाले अपंजीकृत प्रतिष्ठानों के संदर्भ में।
सरकार PMVBRY के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रतिबद्ध है, जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन को बढ़ावा देना तथा कार्यबल के व्यापक वर्ग तक सामाजिक सुरक्षा लाभ पहुँचाना है।