लखनऊ

नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला पर असमंजस पेट्रोल पंप बंद होते ही ठप हुई व्यवस्थाएं, 250 कर्मचारियों के सामने रोज़गार का संकट

नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला पर असमंजस
पेट्रोल पंप बंद होते ही ठप हुई व्यवस्थाएं, 250 कर्मचारियों के सामने रोज़गार का संकट

लखनऊ। लखनऊ नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला (आरआर) को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक असमंजस सामने आया है। गोमती नगर स्थित आरआर परिसर में बन रहे नए मुख्यालय के चलते महापौर द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद परिसर में संचालित पेट्रोल पंप को बंद करा दिया गया। इसका सीधा असर नगर निगम की दैनिक व्यवस्थाओं पर पड़ा है।

पेट्रोल पंप बंद होते ही नगर निगम की कई गाड़ियां आज पूरे शहर में जहां-तहां खड़ी नजर आईं।

वाहन चालकों और कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि अब तेल मिलेगा कहां से? मोबाइल टॉयलेट वाहन, कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां, मार्ग प्रकाश से जुड़ी गाड़ियां और मरम्मत में लगी मशीनें संचालन के अभाव में प्रभावित हो गईं।

आरआर परिसर में लगभग 250 कर्मचारी प्रतिदिन नगर निगम की रीढ़ माने जाने वाले कार्यों को संभालते हैं। इनमें मोबाइल टॉयलेट का रखरखाव, पेट्रोल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट मरम्मत, कूड़ा गाड़ियों की सर्विसिंग और भारी मशीनरी उपकरणों की देखरेख जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इन कर्मचारियों को आखिर काम करने के लिए भेजा कहां जाए?

आरआर कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उन्हें अचानक कार्यशाला खाली करने का निर्देश दे दिया गया, लेकिन यह अब तक तय नहीं किया गया कि कर्मचारियों और मशीनरी को वैकल्पिक रूप से कहां स्थानांतरित किया जाएगा। बिना किसी ठोस योजना के लिया गया यह फैसला निगम की कार्यप्रणाली पर भारी पड़ सकता है।

कर्मचारियों के अनुसार, जो वैकल्पिक स्थल सर्वोदय नगर में चिन्हित किया गया है, वह न केवल पहले की तुलना में काफी छोटा है, बल्कि वहां कब्रिस्तान भी स्थित है। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे स्थान के बीच में मशीनरी के साथ काम करना न तो सुरक्षित है और न ही व्यावहारिक।
कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि जब तक उपयुक्त और पर्याप्त स्थान की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक केंद्रीय कार्यशाला को हटाने का फैसला वापस लिया जाए, अन्यथा नगर निगम की बुनियादी सेवाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं।

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