लखनऊ-हंगामेदार सदन में पास हुए कई अहम प्रस्ताव, नामकरण से लेकर लाइसेंस शुल्क और सुएज–जलकल तक गरमाई राजनीति

हंगामेदार सदन में पास हुए कई अहम प्रस्ताव, नामकरण से लेकर लाइसेंस शुल्क और सुएज–जलकल तक गरमाई राजनीति
लखनऊ। मंगलवार को नगर निगम का सदन भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाने का गवाह बना। कुछ फैसलों से जहां आम जनता को राहत मिली, वहीं अधिकारियों की कार्यप्रणाली, नामकरण, लाइसेंस शुल्क, अतिक्रमण, पॉलिथीन माफिया, जलकल और सुएज जैसे मुद्दों पर सदन में जमकर हंगामा हुआ।
दाखिल-खारिज (नामांतरण) शुल्क में बड़ी राहत
सदन की मंजूरी के बाद अप्रैल माह से दाखिल-खारिज शुल्क बेहद कम कर दिया गया है। इससे संपत्तियों का नामांतरण (म्यूटेशन) कराने वाले लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
चौराहों के नामकरण पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
चौक-चौराहों के नामकरण को लेकर सदन में तीखी बहस हुई,कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने नामकरण पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर पूर्व राज्यपाल स्व. लालजी टंडन के अपमान का आरोप लगाया,भाजपा के मनकामेश्वर वार्ड से पार्षद रंजीत सिंह के विरोध के बाद विवाद इतना बढ़ा कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया, हालांकि दोनों दलों के पार्षदों के हस्तक्षेप से स्थिति शांत हुई।
ट्रेड लाइसेंस शुल्क में 5 गुना तक बढ़ोतरी
नगर निगम ने ट्रेड लाइसेंस शुल्क की दरों में 5 गुना तक बढ़ोतरी को मंजूरी दी,इसके तहत कल्याण मंडप के किराए में भी इजाफा किया गया है,महापौर और नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी, फिलहाल नए प्रतिष्ठानों (जिम, स्पा, कोचिंग सेंटर आदि) पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
अतिक्रमण हटाओ अभियान में लापरवाही पर सख्ती
रोजाना अतिक्रमण हटाने के अभियान को लेकर जोन-1 के जोनल अधिकारी ओपी सिंह पर महापौर ने सदन में नाराजगी जताई,दोपहर 1 से 3 बजे तक अभियान के निर्देशों का पालन न होने पर महापौर ने फटकार लगाते हुए कहा—
“ऐसे जोनल अधिकारी को तत्काल बदला जाना चाहिए।”
पॉलिथीन माफिया पर कसा शिकंजा
महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन बड़े दुकानदारों और गोदामों पर नहीं,जोनल अधिकारियों द्वारा ठिकानों की जानकारी देने पर तत्काल छापेमारी और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
सीवर मेंटेनेंस की समय-सीमा पर पार्षदों के तीखे सवाल
सीवर मेंटेनेंस से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण की समय-सीमा को लेकर पार्षदों ने सुएज और जलकल के अधिकारियों से जवाब मांगा,पार्षदों ने पूछा कि शिकायत के बाद कितने समय में कार्रवाई होती है और यदि समय रहते काम नहीं होता तो किस स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
सुएज की मॉनिटरिंग की मांग
पार्षदों ने आरोप लगाया कि सुएज के कर्मचारी न पार्षदों की सुनते हैं और न ही क्षेत्रीय अधिशासी अभियंता की।
इस पर मांग उठी कि सुएज की मॉनिटरिंग के लिए अधिशासी अभियंता को तैनात किया जाए।
जलकल को 15 दिन का अल्टीमेटम
महापौर ने जलकल के प्रभारी अपर नगर आयुक्त ललित कुमार को निर्देश दिए कि 15 दिनों के भीतर सभी लंबित समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए।
भारतेंदु हरिश्चंद्र वार्ड में सीवर उफान का मुद्दा
भारतेंदु हरिश्चंद्र वार्ड के पार्षद मान सिंह यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में सीवर उफान पर है।
कई बार शिकायत के बावजूद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहा।
पीएम स्वनिधि योजना में फर्जीवाड़े पर डूडा तलब
पीएम स्वनिधि योजना के तहत लाभार्थियों को बांटे गए चेकों में फर्जीवाड़ा सामने आने पर महापौर ने डूडा के अधिकारियों को 3 फरवरी सुबह 11 बजे नगर निगम मुख्यालय तलब किया। कई पार्षदों ने डूडा पर गंभीर आरोप लगाए थे
कतिकी मेला और पिंक टॉयलेट का मुद्दा
मनकामेश्वर वार्ड के पार्षद रंजीत सिंह ने कतिकी मेला में महिलाओं की सुविधा के लिए सुलभ शौचालय बनाए जाने की मांग की। वहीं बंद पड़े पिंक टॉयलेट को लेकर सवाल उठे।
पार्षद सौरभ सिंह ने आरोप लगाया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने पिंक टॉयलेट बंद हैं, जबकि उनमें बनी दुकानें संचालित हो रही हैं।
इस पर महापौर ने पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान से जवाब मांगा, लेकिन वे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।
एनओसी को लेकर संपत्ति विभाग से पार्षदो ने किया सवाल
एक पार्षद ने आरोप लगाया कि एलडीए नगर निगम सीमा में बन रहे भवनों का एनओसी नहीं ले रहा, जिससे नगर निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
संपत्ति विभाग के अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव ने एलडीए उपाध्यक्ष का पत्र पढ़ते हुए कहा कि
एलडीए के पास नगर निगम से जुड़े अभिलेख नहीं हैं, इसलिए तहसील से ही कागजात लिए जाते हैं।
इस पर महापौर ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि एलडीए को पत्र भेजकर एनओसी के मुद्दे पर पुनर्विचार कराया जाए।
आई-कार्ड और ड्रेस कोड पर सख्ती
टैक्स वसूली कर्मियों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य किए गए हैं। साथ ही 296 अतिक्रमण हटाओ अभियान में शामिल कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाएगा।
नगर आयुक्त ने बताया कि 15 दिनों के भीतर सभी कर्मचारी आई-कार्ड और ड्रेस कोड के साथ फील्ड में नजर आएंगे।



