लखनऊ

नव वर्ष पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल बना आस्था का केंद्र, हजारों लोगों ने महापुरुषों को किया नमन

नव वर्ष पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल बना आस्था का केंद्र, हजारों लोगों ने महापुरुषों को किया नमन

लखनऊ।
नववर्ष 2026 के पहले दिन गुरुवार को राजधानी लखनऊ के प्रमुख पार्कों और स्मारकों में जनसैलाब उमड़ पड़ा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) एवं स्मारक समिति द्वारा संचालित पार्कों व स्मारकों में नए साल का जश्न मनाने के लिए लाखों लोग अपने परिवार व मित्रों के साथ पहुंचे।
बसंतकुंज योजना में नव-निर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां हजारों लोगों ने पहुंचकर देश के महान महापुरुषों को नमन किया। राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देने वाले इस स्थल ने लोगों को राष्ट्रभक्ति और गौरव की अनुभूति कराई।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि 65 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया है। 1 जनवरी 2026 से इसे आमजन के लिए खोल दिया गया है।

उन्होंने बताया कि शाम 6 बजे तक 12,397 लोगों ने प्रेरणा स्थल का भ्रमण किया, जिससे ₹1,22,740 की टिकट आय हुई। प्रेरणा स्थल में निर्मित अत्याधुनिक म्यूजियम का प्रवेश शुल्क ₹50 प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है, जबकि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है।

नववर्ष के अवसर पर एलडीए एवं स्मारक समिति के अन्य पार्कों और स्मारकों में भी रिकॉर्डतोड़ भीड़ देखने को मिली।
जनेश्वर मिश्र पार्क में 41,442 लोगों ने भ्रमण किया, जिससे ₹11,77,225 की आय हुई।

डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, गोमती नगर में शाम 6 बजे तक 12,117 दर्शक पहुंचे और ₹3,02,925 की टिकट बिक्री हुई।
मा. श्री कांशीराम ग्रीन ईको गार्डन में 6,400 लोगों की उपस्थिति रही, जहां से ₹1.60 लाख की आय हुई।
डालीगंज स्थित हैप्पीनेस पार्क (बुद्धा पार्क) में 3,700,
यू.पी. दर्शन पार्क में 2,357,
डॉ. राम मनोहर लोहिया पार्क में 2,783 लोग पहुंचे।
वहीं, नोएडा स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल एंड ग्रीन गार्डन में भी नववर्ष के अवसर पर 19,153 लोगों ने पहुंचकर उत्साहपूर्वक नए साल का स्वागत किया।
नववर्ष पर राजधानी के पार्कों और स्मारकों में उमड़ी यह ऐतिहासिक भीड़ न केवल लोगों के उत्साह को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि लखनऊवासी अपनी सांस्कृतिक और राष्ट्रीय धरोहरों से गहरा जुड़ाव रखते हैं।

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