लखनऊ

लखनऊ-वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में नगर निगम पर राजस्व दबाव चरम पर राजस्व इंस्पेक्टरों पर टारगेट का बोझ, कहीं बाज़ी तो कहीं भारी पिछड़ापन

वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में नगर निगम पर राजस्व दबाव चरम पर
राजस्व इंस्पेक्टरों पर टारगेट का बोझ, कहीं बाज़ी तो कहीं भारी पिछड़ापन

रितेश श्रीवास्तव-ऋतुराज

लखनऊ।
वित्तीय वर्ष 2025–26 अपने अंतिम पड़ाव पर है और नगर निगम में राजस्व वसूली को लेकर ज़बरदस्त दबाव बना हुआ है। नगर आयुक्त ने सभी ज़ोन के राजस्व इंस्पेक्टरों (RI) के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार कम से कम 25 प्रतिशत अधिक वसूली हर हाल में सुनिश्चित की जाए।

इस निर्देश के बाद जोन 1 से लेकर जोन 8 तक वसूली अभियान तेज़ कर दिया गया है। कहीं नोटिस, कहीं सीलिंग तो कहीं बकाया वसूली को लेकर रोज़ाना लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। हालांकि, हकीकत यह है कि कई राजस्व इंस्पेक्टर अभी भी अपने टारगेट से कोसों दूर हैं, तो वहीं कुछ RI ने तय लक्ष्य हासिल कर बाज़ी मार ली है और प्रशंसा के पात्र बने हैं। वसूली के इस बढ़ते दबाव का असर अब साफ दिखने लगा है। सूत्रों के मुताबिक कई राजस्व इंस्पेक्टर मानसिक दबाव के चलते छुट्टी पर जाने का मन बना रहे हैं, जिससे विभागीय व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
इसी बीच जोन 4 की स्थिति सबसे ज़्यादा संवेदनशील मानी जा रही है।

जोन 4 की ज़ोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी के अवकाश पर होने से कर वसूली की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ज़ोन में नेतृत्व की कमी के चलते फील्ड स्तर पर वसूली अभियान कमजोर पड़ सकता है।
नगर निगम प्रशासन के लिए अब यह बड़ी चुनौती बन गई है कि टारगेट भी पूरा हो,राजस्व कर्मचारी टूटें भी नहीं,
और वित्तीय वर्ष के अंत तक आंकड़े संतोषजनक रहें।
आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कौन ज़ोन लक्ष्य हासिल करता है और कौन दबाव में पिछड़ जाता है।

Related Articles

Back to top button